Saturday, March 5, 2011

morning raga

इतना सुंदर स्वपन जब टूटा तो पता चला की सवेरा हो चला है ,

चिड़िया ने जब चेह्का तो पता चला की दुनिया जाग उठी है,

हर रंग नया लिबास नया ओढ़े यह ज़िन्दगी चल पढ़ी है,

रात की अंधियारी को पीचे छोड़ इतिहास अब रच चूका है ,

कौन जाने रात ने क्या समेटा ? 

जो सब जाने है की सुबह क्या नया है देता ,

रात है बलवान उसने है सब देखा ,

मन के अंतर्द्वंद को खगाल उसने सुबह को बुलाया ,

रात का रंग काला है तो क्या हुआ ,

उसी रात में आजादी का फूल खिला है ,

उसी रात में एक नयी ज़िन्दगी का आह्वान हुआ है ,

अब यह तो  तुमे   है  तय  करना  की रात भली या दिन,

सच  तो यह है मित्र ,

अगर सब है अच्छा तो रात में भी दिन है निकलता ||                      

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